सेवा से संस्कार और संस्कार से नेतृत्व: NSS स्वयंसेवक एक विशिष्ट व्यक्तित्व 24 सितंबर ( एन एस एस स्थापना दिवस विशेष)
सेवा से संस्कार और संस्कार से नेतृत्व: NSS स्वयंसेवक एक विशिष्ट व्यक्तित्व
24 सितंबर ( एन एस एस स्थापना दिवस विशेष)
डॉ राजीव रंजन तिग्गा
लेखक बगीचा महाविद्यालय के एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी हैं
किसी विद्यार्थी की पहचान केवल उसके परीक्षा परिणाम, डिग्री या शैक्षणिक उपलब्धियों से नहीं होती। उसके व्यक्तित्व की वास्तविक पहचान इस बात से होती है कि वह समाज के प्रति कितना संवेदनशील है, दूसरों के लिए कितना उपयोगी है और अपने दायित्वों को कितनी जिम्मेदारी से निभाता है। इसी दृष्टि से राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
NSS स्वयंसेवक केवल किसी संस्था का सदस्य नहीं होता, बल्कि वह सेवा, अनुशासन, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना का प्रतिनिधि होता है। उसकी यात्रा सेवा से शुरू होती है, सेवा से संस्कार विकसित होते हैं और वही संस्कार आगे चलकर नेतृत्व की क्षमता को जन्म देते हैं।
सेवा—व्यक्तित्व निर्माण की पहली सीढ़ी
सेवा मनुष्य को अपने सीमित स्वार्थ से बाहर निकलना सिखाती है। जब कोई विद्यार्थी समाज के लिए अपना समय, श्रम और ऊर्जा देता है, तो उसके भीतर दूसरों के प्रति संवेदनशीलता विकसित होती है।
NSS स्वयंसेवक स्वच्छता अभियान, जनजागरूकता रैली, ग्राम संपर्क, वृक्षारोपण, स्वास्थ्य एवं पोषण जागरूकता, नशामुक्ति अभियान, बाल विवाह के विरुद्ध जनजागरण, शिक्षा एवं पर्यावरण संरक्षण जैसे कार्यों में भाग लेते हुए समाज की वास्तविक परिस्थितियों से परिचित होता है।
कक्षा में पढ़ी गई सामाजिक जिम्मेदारी की अवधारणा जब धरातल पर उतरती है, तभी उसका वास्तविक अर्थ समझ में आता है। यही NSS की विशेषता है।
संस्कार—सेवा की सबसे बड़ी उपलब्धि
किसी भी सेवा कार्य की सफलता केवल इस बात से नहीं मापी जा सकती कि कितने कार्यक्रम हुए या कितने लोग उसमें शामिल हुए। उसका वास्तविक प्रभाव स्वयंसेवक के व्यवहार और सोच में दिखाई देता है।
सेवा करते-करते स्वयंसेवक में समय की पाबंदी, अनुशासन, सहयोग, सहानुभूति, विनम्रता और जिम्मेदारी जैसे गुण विकसित होते हैं। वह सीखता है कि समाज में प्रत्येक व्यक्ति महत्वपूर्ण है और छोटी-सी सकारात्मक पहल भी परिवर्तन की शुरुआत बन सकती है।
यही सेवा धीरे-धीरे संस्कार में परिवर्तित होती है।
संस्कार से जन्म लेता है नेतृत्व
नेतृत्व केवल मंच पर भाषण देने या दूसरों को निर्देश देने का नाम नहीं है। वास्तविक नेतृत्व वह है जिसमें व्यक्ति स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करता है और दूसरों को साथ लेकर आगे बढ़ता है।
NSS स्वयंसेवक को विभिन्न गतिविधियों में जिम्मेदारियाँ निभाने का अवसर मिलता है। वह कार्यक्रम की योजना बनाता है, साथियों के साथ समन्वय करता है, समुदाय से संवाद करता है और अनेक परिस्थितियों में निर्णय लेना सीखता है।
इन अनुभवों से उसमें आत्मविश्वास, संवाद-कौशल, निर्णय क्षमता और टीम भावना विकसित होती है।
इस प्रकार NSS की प्रक्रिया को तीन शब्दों में समझा जा सकता है—
सेवा → संस्कार → नेतृत्व
सेवा व्यक्ति को संवेदनशील बनाती है, संस्कार उसे जिम्मेदार बनाते हैं और जिम्मेदारी उसे नेतृत्व के लिए तैयार करती है।
NSS स्वयंसेवक क्यों है विशिष्ट?
NSS स्वयंसेवक की विशिष्टता उसके पहनावे या पहचान-पत्र में नहीं, बल्कि उसके व्यवहार में दिखाई देती है। वह भीड़ का हिस्सा बनने के बजाय समाज के लिए कुछ करने की मानसिकता विकसित करता है।
वह समस्या देखकर केवल शिकायत नहीं करता, बल्कि समाधान का हिस्सा बनने का प्रयास करता है। वह समाज की कमियों को देखकर निराश होने के बजाय सकारात्मक परिवर्तन के लिए आगे आने की कोशिश करता है।
एक अच्छा स्वयंसेवक दूसरों को बदलने से पहले स्वयं में परिवर्तन लाने का प्रयास करता है। यही उसकी सबसे बड़ी विशेषता है।
आज का समय तकनीकी और सामाजिक परिवर्तन का समय है। सोशल मीडिया ने संवाद को आसान बनाया है, लेकिन साथ ही गलत सूचना, डिजिटल लत और सामाजिक दूरी जैसी चुनौतियाँ भी सामने आई हैं। ऐसे दौर में युवाओं को केवल तकनीकी रूप से सक्षम होना पर्याप्त नहीं है; उन्हें सामाजिक और नैतिक रूप से भी जागरूक होना आवश्यक है।
NSS स्वयंसेवक डिजिटल माध्यमों का उपयोग भी सकारात्मक सामाजिक संदेशों के लिए कर सकता है। स्वच्छता, नशामुक्ति, पर्यावरण, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल सुरक्षा तथा सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर जागरूकता फैलाने में युवा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
गाँव और समुदाय से जुड़ता युवा
NSS का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष है—समाज के बीच जाना। जब स्वयंसेवक गाँवों में घर-घर संपर्क करता है, लोगों से संवाद करता है, रैली निकालता है या नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत करता है, तब वह समाज को केवल संदेश नहीं देता, बल्कि समाज से बहुत कुछ सीखता भी है।
उसे ग्रामीण जीवन की चुनौतियों, लोगों की आवश्यकताओं और स्थानीय संस्कृति को समझने का अवसर मिलता है। यह अनुभव उसकी सोच को व्यापक बनाता है और उसके भीतर सामाजिक संवेदनशीलता को मजबूत करता है।
प्रमाण-पत्र से आगे की यात्रा
NSS को केवल प्रमाण-पत्र या किसी औपचारिक उपलब्धि तक सीमित करना उसके व्यापक उद्देश्य को छोटा करना होगा। NSS की वास्तविक उपलब्धि तब है जब स्वयंसेवक के जीवन में सेवा की भावना स्थायी रूप से विकसित हो।
कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भी यदि स्वयंसेवक स्वच्छता के प्रति जागरूक रहता है, जरूरतमंद की सहायता करता है, सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध आवाज उठाता है और अपने दायित्वों को ईमानदारी से निभाता है, तो यही NSS की वास्तविक सफलता है।
आज के युवा और राष्ट्र निर्माण
राष्ट्र निर्माण केवल बड़ी योजनाओं और संस्थाओं का कार्य नहीं है। यह छोटे-छोटे जिम्मेदार कार्यों से भी होता है। जब युवा अपने गाँव, अपने महाविद्यालय और अपने समाज के लिए जिम्मेदारी स्वीकार करते हैं, तब राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया मजबूत होती है।
NSS युवाओं को यही अवसर देता है कि वे अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा दें और समाज के प्रति अपनी भूमिका को समझें।
निष्कर्ष
राष्ट्रीय सेवा योजना विद्यार्थी को केवल स्वयंसेवक नहीं बनाती, बल्कि उसे संवेदनशील नागरिक बनने की दिशा में आगे बढ़ाती है।
सेवा उसके भीतर संस्कार पैदा करती है। संस्कार उसके चरित्र को मजबूत करते हैं। मजबूत चरित्र जिम्मेदारी की भावना पैदा करता है और जिम्मेदारी से नेतृत्व का विकास होता है।
इसलिए—
सेवा से संस्कार, संस्कार से व्यक्तित्व और व्यक्तित्व से नेतृत्व—यही NSS स्वयंसेवक की विकास-यात्रा है।
आज समाज को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो केवल अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए भी सोचें; जो समस्याओं की चर्चा मात्र न करें, बल्कि समाधान के लिए आगे आएँ; और जो नेतृत्व पद से नहीं, बल्कि अपने आचरण से करें।
NSS स्वयंसेवक की असली पहचान यही है—वह सेवा करता है, सेवा से सीखता है और अपने संस्कारों के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन की संभावना पैदा करता है।