जशपुर के वरिष्ठ इतिहासकार डॉ. विजय कुमार रक्षित से पीएचडी शोधार्थियों की सौजन्य भेंट*

जशपुर के वरिष्ठ इतिहासकार डॉ. विजय कुमार रक्षित से पीएचडी शोधार्थियों की सौजन्य भेंट*

*जशपुर के वरिष्ठ इतिहासकार डॉ. विजय कुमार रक्षित से पीएचडी शोधार्थियों की सौजन्य भेंट*

शोध, अकादमिक अनुशासन और स्थानीय अध्ययन पर हुई विस्तृत चर्चा
जशपुरनगर।

जशपुर जिले की शैक्षणिक एवं बौद्धिक परंपरा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के अंतर्गत जिले के प्रख्यात इतिहासकार, शिक्षाविद् एवं पूर्व प्राचार्य डॉ. विजय कुमार रक्षित से दो पीएचडी शोधार्थियों ने आज सौजन्य भेंट की। यह भेंट शोध से संबंधित आवश्यक विषयों पर विचार-विमर्श, मार्गदर्शन एवं अकादमिक संवाद के उद्देश्य से संपन्न हुई।
इस अवसर पर राजनीति शास्त्र विषय के पीएचडी  शोधार्थी जयेश सौरभ टोपनो तथा हिंदी साहित्य विषय के शोधार्थी मुकेश कुमार उपस्थित रहे। दोनों शोधार्थियों ने अपने-अपने शोध विषयों को लेकर डॉ. रक्षित से विस्तृत चर्चा की तथा शोध प्रक्रिया से जुड़े विविध शैक्षणिक पहलुओं पर मार्गदर्शन प्राप्त किया।
शोधार्थियों की पहल : अकादमिक संवाद की सशक्त परंपरा
आज के समय में शोध केवल औपचारिक डिग्री तक सीमित न रहकर समाज, संस्कृति और इतिहास की गहन समझ का माध्यम बनता जा रहा है। इसी दृष्टिकोण के साथ दोनों शोधार्थियों ने वरिष्ठ विद्वान डॉ. विजय कुमार रक्षित से भेंट कर अपने शोध कार्य को और अधिक प्रामाणिक एवं सार्थक बनाने का प्रयास किया।
शोधार्थियों ने स्पष्ट किया कि वे अपने शोध में केवल सैद्धांतिक अध्ययन तक सीमित न रहकर स्थानीय संदर्भों, ऐतिहासिक तथ्यों और सामाजिक संरचना को भी शामिल करना चाहते हैं। इसी उद्देश्य से उन्होंने डॉ. रक्षित जैसे अनुभवी इतिहासकार से प्रत्यक्ष संवाद को आवश्यक माना।
डॉ. विजय कुमार रक्षित : शिक्षा और इतिहास का समर्पित व्यक्तित्व
डॉ. विजय कुमार रक्षित जशपुर जिले के उन शिक्षाविदों में गिने जाते हैं, जिन्होंने दशकों तक शिक्षा और इतिहास के क्षेत्र में सक्रिय योगदान दिया है। वे पूर्व में शासकीय राम भजन राय एन.ई.एस. स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जशपुर के प्राचार्य के पद पर कार्यरत रहे हैं।
अपने शैक्षणिक जीवन के दौरान उन्होंने न केवल महाविद्यालयीन शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ किया, बल्कि विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को स्थानीय इतिहास, संस्कृति और समाज के अध्ययन के लिए प्रेरित किया। जशपुर जिले के इतिहास, जनजातीय समाज और सांस्कृतिक विरासत पर उनका लेखन एवं शोध विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा है।
शोध पद्धति और विषय चयन पर विस्तृत चर्चा
सौजन्य भेंट के दौरान डॉ. रक्षित ने दोनों शोधार्थियों से उनके शोध विषयों की जानकारी प्राप्त की और शोध की दिशा, उद्देश्य एवं पद्धति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि पीएचडी स्तर का शोध केवल विषय की गहराई से जुड़ा नहीं होता, बल्कि उसमें दृष्टिकोण की स्पष्टता और अकादमिक अनुशासन भी उतना ही आवश्यक होता है।
डॉ. रक्षित ने पॉलिटिकल साइंस के शोधार्थी को सुझाव दिया कि वे राजनीतिक संरचनाओं का अध्ययन केवल सैद्धांतिक ढांचे में न करें, बल्कि स्थानीय शासन प्रणाली, जनजातीय नेतृत्व और क्षेत्रीय राजनीति के सामाजिक प्रभावों को भी अपने शोध में शामिल करें। इससे शोध अधिक व्यावहारिक और समाजोपयोगी बन सकेगा।
वहीं हिंदी साहित्य के शोधार्थी को उन्होंने क्षेत्रीय साहित्य, लोकभाषा, जनजातीय अभिव्यक्तियों और स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं को साहित्यिक अध्ययन से जोड़ने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि हिंदी साहित्य का शोध तभी पूर्ण होता है, जब वह समाज की वास्तविक आवाज़ को प्रतिबिंबित करे।
जशपुर : शोध की अपार संभावनाओं वाला अंचल
चर्चा के दौरान जशपुर जिले की ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विशेषताओं पर भी प्रकाश डाला गया। डॉ. रक्षित ने बताया कि जशपुर जिला न केवल प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यह क्षेत्र ऐतिहासिक दृष्टि से भी अत्यंत समृद्ध रहा है।
उन्होंने कहा कि जशपुर का जनजातीय समाज, उसकी परंपराएँ, सामाजिक संरचना और ऐतिहासिक घटनाएँ शोधार्थियों के लिए अध्ययन का व्यापक क्षेत्र प्रदान करती हैं। यदि इन विषयों को अकादमिक ढंग से प्रस्तुत किया जाए, तो वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध जगत में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
“पर्यटन का स्वर्ग – जशपुर” पुस्तक का भेंट
इस अवसर पर डॉ. विजय कुमार रक्षित ने शोधार्थियों को अपनी प्रसिद्ध पुस्तक “पर्यटन का स्वर्ग – जशपुर” भेंट की। यह पुस्तक जशपुर जिले के प्राकृतिक पर्यटन स्थलों, ऐतिहासिक धरोहरों, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक संरचना का विस्तृत एवं प्रामाणिक विवरण प्रस्तुत करती है।
डॉ. रक्षित ने बताया कि इस पुस्तक का उद्देश्य जशपुर को केवल पर्यटन स्थल के रूप में नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और ऐतिहासिक इकाई के रूप में प्रस्तुत करना है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक शोधार्थियों के लिए संदर्भ ग्रंथ के रूप में उपयोगी सिद्ध हो सकती है, विशेषकर उन विषयों में जहाँ इतिहास, समाज और संस्कृति का अंतर्संबंध दिखाई देता है।
शोधार्थियों की प्रतिक्रिया
पुस्तक प्राप्त करने के उपरांत दोनों शोधार्थियों ने डॉ. रक्षित के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ विद्वान से प्रत्यक्ष संवाद और उनके द्वारा प्रदान किया गया मार्गदर्शन उनके शोध कार्य को नई दिशा प्रदान करेगा।
शोधार्थियों का कहना था कि पीएचडी स्तर पर शोध करते समय अनुभवी शिक्षाविदों के अनुभव से सीखना अत्यंत आवश्यक होता है। इससे न केवल शोध की गुणवत्ता में सुधार होता है, बल्कि विषय को देखने का दृष्टिकोण भी व्यापक होता है।
अकादमिक परंपरा को सशक्त करती पहल
यह सौजन्य भेंट जशपुर जिले की शैक्षणिक परंपरा के लिए एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में देखी जा रही है। आज जब शोधार्थी वरिष्ठ शिक्षाविदों से संवाद स्थापित कर रहे हैं, तो यह ज्ञान की निरंतरता और अकादमिक संस्कृति के सुदृढ़ होने का संकेत है।
डॉ. विजय कुमार रक्षित ने इस अवसर पर कहा कि उनका अनुभव तभी सार्थक है, जब वह युवा शोधार्थियों के कार्य में उपयोगी सिद्ध हो। उन्होंने शोधार्थियों को निरंतर अध्ययन, धैर्य और ईमानदारी के साथ शोध कार्य करने की प्रेरणा दी।
डॉ. विजय कुमार रक्षित से पीएचडी शोधार्थियों की यह सौजन्य भेंट शोध, इतिहास और अकादमिक संवाद का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। इस प्रकार की मुलाकातें न केवल शोधार्थियों को मार्गदर्शन प्रदान करती हैं, बल्कि जिले की बौद्धिक पहचान को भी सशक्त बनाती हैं।
जशपुर जैसे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रूप से समृद्ध अंचल में इस तरह के शैक्षणिक संवाद भविष्य में शोध, लेखन और शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक प्रभाव छोड़ेंगे—ऐसी अपेक्षा की जा रही है।