राईपाठ की महिलाओं ने दिखाई आत्मनिर्भरता की नई राह ,जशपुर।

राईपाठ की महिलाओं ने दिखाई आत्मनिर्भरता की नई राह ,जशपुर।
राईपाठ की महिलाओं ने दिखाई आत्मनिर्भरता की नई राह ,जशपुर।

राईपाठ की महिलाओं ने दिखाई आत्मनिर्भरता की नई राह
जशपुर।
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के देवीडड़गांव ग्राम पंचायत के छोटे से गांव राईपाठ की महिलाओं ने मेहनत और एकता से आत्मनिर्भर बनने की एक अच्छी मिसाल पेश की है। जय बिहान योजना से जुड़ी गेंदा महिला स्वसहायता समूह की महिलाओं ने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और रोजगार बढ़ाने के लिए टेंट व्यवसाय शुरू किया है। उनकी यह पहल गांव और आसपास के क्षेत्रों में चर्चा का विषय बनी हुई है।
समूह की सक्रिय महिला श्रीमती अंजना बखला के नेतृत्व में महिलाओं ने पिछले तीन वर्षों से लगातार मेहनत की। आर्थिक परेशानियों के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। महिलाओं ने पहले आलू और मघा की खेती की, माला बेची और कपड़ों का व्यवसाय भी किया। धीरे-धीरे उन्होंने अपनी बचत बढ़ाई और उसी से टेंट खरीदा।
अब समूह की महिलाएं टेंट को किराए पर देकर अच्छी आमदनी कर रही हैं। इससे उन्हें आर्थिक सहारा मिला है और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है। महिलाओं का कहना है कि वे अब अपने परिवार की जिम्मेदारियों को खुद निभाने में सक्षम हैं और किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहतीं।
समूह की सदस्य अंजना बाखला ने कहा कि,
“महिलाएं किसी से कम नहीं हैं। अगर महिलाएं मेहनत करें तो वे अपने परिवार और समाज दोनों को आगे बढ़ा सकती हैं। हमने मिलकर काम किया और आज हमें इसका अच्छा परिणाम मिल रहा है।”
इस समूह में अंजना बाखला के साथ-साथ सफ़ीरा कुजूर, कुमुदिनी खलखो, बेलवंती बाई, बलमदीना बखला, विजयकांता तिग्गा, रश्मि तिग्गा, आसरेन बखला और एलिजाबेथ तिग्गा ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। सभी महिलाओं ने मिलकर एकता और मेहनत से इस काम को सफल बनाया।
ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं द्वारा शुरू किया गया यह टेंट व्यवसाय दूसरी महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रहा है। यह पहल दिखाती है कि यदि महिलाओं को सही अवसर और सहयोग मिले, तो वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ समाज में अपनी अलग पहचान भी बना सकती हैं।
गेंदा महिला स्वसहायता समूह की यह सफलता महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सराहनीय कदम मानी जा रही है।